हिन्दी कहानीबिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय कहानीदर्शन होते हैं। 'राजरानी' हिरन की आँखें, तमाशा, मोर्चा आदि इनकीसे इस युग की कहानियों की भाषा उतनी प्रौढ़ और परिमार्जित भाषा नहीं है जितनीप्रेमचन्द के समान ही विश्वम्भर नाथ श
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हिन्दी कहानीबिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय कहानीदर्शन होते हैं। 'राजरानी' हिरन की आँखें, तमाशा, मोर्चा आदि इनकीसे इस युग की कहानियों की भाषा उतनी प्रौढ़ और परिमार्जित भाषा नहीं है जितनीप्रेमचन्द के समान ही विश्वम्भर नाथ श